एक शाम, हरिवंश के नाम
... प्रभात खबर के प्रधान संपादक हरिवंश को पढ़ना और सुनना यूं भी काफी दिलचस्प, प्रेरक और ज्ञानवर्द्धक होता है। वह भी जब विषय बिलकुल लीक से हटकर हो। यही कारण है कि सात जुलाई 2011 की शाम सात बजे विकास भारती में ‘एक शाम, हरिवंश के नाम‘ कार्यक्रम के लिए श्री अशोक भगत का बुलावा आया तो मैंने इसमें जाना जरूरी समझा। भगत जी ने इसमें अपने करीबी चुनिंदा सामाजिक कार्यकत्र्ताओं, अधिकारियों, बुद्धिजीवियों, नागरिकों को ही न्यौता था। विषय था - ‘कैलाश मानसरोवर यात्रा के संस्मरण‘। READ
अन्ना, रामदेव पर प्रहार का मूलमंत्र
... अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के आंदोलन ने राजनेता-नौकरशाह-कारपोरेट गंठजोड़ की खुली लूट पर गंभीर सवाल उठाये हैं. ये ऐसे सवाल हैं, जो लंबे समय से भारतीय राज-समाज को मथ रहे हैं. कांग्रेस और उसका चाटुकार मीडिया उन सवालों पर चर्चा के बजाय सवाल उठाने वालों पर ही चर्चा केंद्रित करके बचाव का रास्ता ढूंढ़ रहा है. Read
गांव और गरीबों तक पहुंचने की पहल
 ... झारखंड का राजनीतिक माहौल काफी निराशाजनक है। अलग राज्य बनने के नौ साल में सात मुख्यमंत्री बदले। निराशा के इस माहौल में झारखंड के मुख्य सचिव डा. अशोक कुमार सिंह ने राज्य के गांवों में जाकर ग्रामीणों और गरीबों की समस्याओं को समझने और उनका त्वरित समाधान करने का सिलसिला प्रारंभ कर दिया है। READ
खुशहाली का पहला खाका
..... दस साल के बाद झारखंड ने बदलाव की नयी राह तलाशने का प्रयास किया है। पहली बार पंचवर्षीय योजना बनाकर विकास का दीर्धकालीन खाका तैयार करने की कोशिश शुरू हुई है। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा विभिन्न विषयों पर बुद्धिजीवियों, नागरिकों, तकनीकी विशेषज्ञों के साथ चर्चा करके राज्य को विकास की पटरी पर लाने की ठोस योजना बना रहे हैं। READ

उग्रवाद की गोद में विकास की पहल

... लगभग सत्ताइस साल पहले चार सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नेतरहाट के वीरान इलाके बिशुनपुर में आदिवासियों के बीच विकास का अलख जगाना शुरू किया। आज वह प्रयास जादू की तरह अपना असर दिखा रहा है।  जिन उग्रवाद इलाकों में पुलिस भी नहीं घुसती वहाँ इसकी सहज पहुँच है।  विकास भारती की स्थापना 1983 में अशोक भगत, डॉ. महेश शर्मा, रजनीश अरोड़ा और स्वर्गीय डॉ. राकेश पोपली की पहल पर हुई थी। विकास भारती के वर्तमान सचिव अशोक भगत बिशनपुर के आदिवासी समुदाय के बीच कार्य करने के मिशन के साथ आए थे। उन्होंने क्षेत्र का सर्वेक्षण किया तो महसूस किया कि इस समुदाय के बीच कार्य करने के मिशन के साथ आए थे। READ

बदल रहे हैं, गांव, देहात और जंगल  

... हरिवंश :   फ़रवरी 2008 में चतरा के नक्सल दृष्टि से सुपर सेंसिटिव गांवों में जाना हुआ. .....यह फ़रवरी 2008 में लिखी गयी रपट है. कभी डालटनगंज-चतरा के इन इलाकों में खूब घूमना हुआ. समाजवादी चिंतक, अब बौद्ध अध्येता व दार्शनिक कृष्णनाथजी से सुना था. कैसे लोग पत्तों को खाकर जीवन गुजारते थे? ... फ़िर रांची प्रभात खबर आना हुआ. और साबका हुआ, 1991-92 के अकाल से. प्रभात खबर, रांची के कुछ साथी, डालटनगंज के साथी, सब मिल कर सक्रिय हुए. त्रिदिव घोष, फ़ैसल अनुराग, डॉ सिद्धार्थ मुखर्जी, कर्नल बख्शी, गोकुल बसंत वगैरह के अनथक परिश्रम, प्रतिबद्धता और हर इलाके में भ्रमण से, अकाल मुद्दा बना. राहत पहुंचायी गयी. READ